हैण्डीक्राफ्ट उद्योगों पर नया शिकंजा, एक्सपोटर्स में हड़कम्प

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जोधपुर .

जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग की हालत दिनोदिन बिगड़ती जा रही है और हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक घबराए हुए है। इसका कारण नेटवर्क फोर सर्टिफिकेशन एण्ड कंजर्वेशन ऑफ फोरेस्ट (एनसीसीएफ ) है। अब यह संस्था आम व बबूल की लकड़ी के बने उत्पादों को निर्यात के लिए सर्टिफिकेशन की तैयारी कर रही है। निर्यातक पहले ही कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एण्ड फ्लोरा (साइटस ) द्वारा शीशम की लकड़ी पर रोक और उसके बाद शीशम की लकड़ी के उत्पादों के निर्यात के लिए अनिवार्य 'वृक्ष' सर्टिफिकेट की चुनौती का सामना कर ही रहे है। इससे करीब पिछले 18 माह में 500 करोड़ का बिजनेस टूट चुका है।

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प्राइवेट संस्था

एनसीसीएफ एक प्राइवेट संस्था है, जो हाल ही में सोसायटी के रूप में रजिस्टर्ड हुई है । इस संस्था में निर्यातक, सेवानिवृत्त वन अधिकारी, कंसलटेंट्स, ईपीसीएच, वृक्ष सर्टिफि केट इंप्लीमेंट एजेन्सी डायरेक्टर व कुछ अन्य लोग इसके सदस्य है । इसमें दो सरकारी सदस्यो को नोमिनेट किया है एक सदस्य कृषि विभाग से व एक सदस्य वन विभाग से है ।

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लागू हुआ तो इंडस्ट्री बर्बाद

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने बतया कि आम और बबूल की भारत में खेती की जाती है । किसान आम को अपने खेतों में निजी स्तर पर उगाते है, यह वानिकी उत्पाद होने का सवाल ही नहीं है। अगर यह नियम लागू हुआ तो जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को बड़ा नुकसान होगा और इंडस्ट्री बर्बाद हो जाएगी। पहले ही, शीशम के निर्यात पर अंतरराष्ट्रीय समस्या के कारण 'वृक्षÓ सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। दूसरी अन्य लकडि़यों के लिए किसी तरह की कोई समस्या नही है । आम व बबूल की लकड़ी में लकड़ी की उपलब्धता, उसके स्थान आदि का पता लगाने जैसा मामला ही नहीं है और न ही इसमें साईटस की समस्या है । इस वजह से आम-बबूल की लकड़ी के लिए एनसीसीएफ के सर्टिफि केशन की औपचारिकता की जरूरत ही नहीं है।

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मंत्री को बताई समस्या

डॉ. दिनेश ने बताया कि एसोसिएशन के माध्यम से इस मामले को केन्द्रीय कृषि व कृषक कल्याण राज्यमंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत को इस नई समस्या से अवगत कराया गया है। उम्मीद है जल्द ही समस्या का निपटारा होगा । ------

कुछ असंगठित क्षेत्रों के लिए यह सर्टिफिकेट लागू करने की योजना है कि लकड़ी की उपलब्धता वैध तरीके से हो रही है या नहीं। एनसीसीएफ को बताएंगे कि अगर कोई लेना चाहे तो, ले सकता है, यह सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं होना चाहिए।

गिरीश अग्रवाल, को-चेयरमैन

एनसीसीएफ



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