जोधपुर में साइंस वर्ग का रिजल्ट 89.56 प्रतिशत तो कॉमर्स में 89.35 रहा

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जोधपुर . राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से सोमवार को विज्ञान वर्ग व वाणिज्य वर्ग के घोषित परिणाम में जोधपुर जिले के छात्र-छात्राओं ने एक बार फिर अपनी सफलता का परचम फहराया। इस बार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से राज्य स्तरीय व जिला स्तरीय मेरिट घोषित नहीं की गई। इसके बावजूद सफलतम रिजल्ट में हमारा जोधपुर अग्रणीय रहा । जोधपुर विज्ञान वर्ग का रिजल्ट 89.56 प्रतिशत तक पहुंचा है। जोधपुर में वाणिज्य वर्ग में परिणाम 89 .35 प्रतिशत रहा है। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में दोनों का रिजल्ट घटा है। वाणिज्य व विज्ञान वर्ग के जारी परिणाम में एक बार फिर से बेटियां रिजल्ट प्रतिशत में आगे रही है।

 

 

शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी शाम बोर्ड की वेबसाइट पर परिणाम जारी किया। 12वीं बोर्ड की परीक्षा में जोधपुर जिले से 41 हजार 385 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। जानकारी के लिए बता दें कि बोर्ड पिछले साल से बारहवीं विज्ञान, वाणिज्य और कला वर्ग सहित दसवीं के परिणाम के साथ मेरिट जारी करना बंद कर चुका है। प्रदेश और जिला स्तर पर कोई मेरिट जारी नहीं होगी। विद्यार्थियों को परिणाम को लेकर बेसब्री रिजल्ट आने के साथ ही समाप्त हुई। विद्यार्थी बारहवीं के परिणाम के बाद अपने कॅरियर संबंधित निर्णय ले पाएंगे। जहां विद्यार्थियों को परिणाम आने का इंतजार पूरा हुआ। वहीं परीक्षाओं की शुरुआत में उनके होश ही उड़ गए थे। उल्लेखनीय है गत 7 मार्च से शुरू हुई राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों ने पहला पेपर अंग्रेजी का दिया था। परीक्षा का प्रश्न-पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की अफवाह चलने लग गई थी। लेकिन अफवाह में कोई सच्चाई नहीं निकली। वायरल पेपर भी पुराना बताया जा रहा था। एकबारगी परीक्षा देकर निकले कई विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी तो कोई मायूस नजर आया था। दूसरी ओर सुबह सोशल मीडिया पर एक पीले रंग का पेपर वायरल हुआ था। हालांकि उस पेपर पर साल 2018 लिखा हुआ था। लेकिन वास्तविक पेपर से वायरल प्रश्न-पत्र के सवाल हूबहू नहीं मिले। यह पेपर गत वर्षों का बताया जा रहा था। साथ ही यह करतूत भी कुछ शरारती तत्वों की बताई जा रही थी। परीक्षा के लिए जोधपुर में 267 परीक्षा केन्द्र बनाए गए थे। इनमें 19 संवेदनशील व 10 अतिसंवेदनशील रखा गया था। प्रत्येक संवेदनशील व अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर शिक्षा विभाग के अलावा अन्य विभाग के अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर लगाया गया था। प्रत्येक थाने पर एक राजपत्रित अधिकारी पेपर समन्वयक था, जो प्रतिदिन संबंधित थाने में केन्द्राधीक्षक व अतिरिक्त केन्द्राधीक्षक की उपस्थिति में दिनांक, विषय और कक्षा का मिलान कर संबंधित केन्द्राधीक्षक को प्रश्न पत्र वितरित किया था।



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