अपहृत भूपेंद्र तो मिल गया,पर इन अनगिनत सवालो के सवाब न मिले?

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सभी मित्रों को सादर प्रणाम ।
मित्रों पिछले काफी दिनों से जोधपुर का अखबार पढ पढ के मन बहुत दूखी और व्यथित हो रहा है । हम कहाँ  और कैसे  जी रहै है ,सूबह सूबह अखबार  खोलते ही अपहरण और लूटपाट की वारदातोंकी खबरें पिछले एक महीने से जारी है । हाईवे पर हो रही खुलेआम लूटपाट डकैती और मारपीट और दिन दहाड़े बच्चों का अपहरण और नतीजा वो ही ढाका के तीन पात।
पूलीस जांच कर रही है हम खबरें पढ़ें रहै है बच्चों के परिजन दूखी है लूटने वाले मन मशोस कर बैठे है । सबसे बड़ी बात जिम्मेदार लोग मुँह बंद करके बैठे है जिनमें हमारे जिले के दस विधायक जिनमें तीन मंत्री एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक सांसद महोदय और छोटे बड़े  सैकड़ों छुटभैया नेतागण है।
मुद्दे की बात यह है की इनमें से किसी ने कुछ नहीं बोला इन घटनाओं ।
""बोलेंगे भी कैसे""

" मंत्री और नेताओं को आपसी खींचतान और झगड़ो से ही फुर्सत नहीं है किस को निचा दिखाना है कैसे दिखाना है
"हो सकता है ये अपहर्ताओ और डकैतो में से कोई चूनाव में काम आने वाला भी हो ,
"अपने लोग को ठेके कैसे और कहा दिलाने है किस सरकारी कर्मचारी को हटाना है लगाना है ,
"इनको शादियो मे जाना पड़ता है उठावणो मे जाना पड़ता है उद्घाटनो में जाना होता है कार्यक्रमों के ही नेता हैं जनता की तकलीफों से क्या लेना देना भाई ।
"किसी होटल वाले का टेकस बचाना हो तो सांसद साहब के पी ए साहब निगम सिओ की कालर पकड़ने मे देर नही करेंगे पर इन गुंडो से तो इनहे भी डर लगता है साहब ।
"
बहुत तकलीफ होती है जब कोई मां का लाडला अपहर्ताओ के चंगुल मे हो उसका एक एक पल कैसे कटता होगा । क्या गुजरती होगी जब किसी के खून पसीने की कमाई कोई रिवालवर दिखा कर ले जाए । पर इन जिम्मेदारो के सीने मैं दिल नहीं पत्थर है भाई।
कोई जानता हो इन नेता लोगों को तो बता देना भाई  वरना मन मारकर तो बैठे ही है ।
काश एक राजा होता तो पता चलता भाई यहाँ तो हर एक राजा है किसे कहै ।
जोधपुर डांगियावास का नागरिक ।
Nathuram jat

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