जन्मदिन को उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी भी मनाते हैं। 25 दिसम्बर को सोशल मीडिया पर अटल जी का जन्मदिन एक राष्ट्रीय पर्व की तरह दिखाई पड़ रहा था। ऐसे व्यक्तित्व को कौन नमन नहीं करेगा, जिसने राजनीतिक चालबाजियों को भी शुचितावादी रवैये में ढाल दिया।
राजनीतिक अस्थिरता के दौर में बगैर बहुमत के सफलतापूर्वक संसद का संचालन करने वाले अटल जी को इसी साल 27 मार्च को सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार “भारतरत्न” से समानित किया गया है। महान राजनेता के अलावा ओजस्वी वक्ता, दार्शनिक और छायावादी कवि के रूप में भी यश प्राप्त करने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन के इन छुए-अनछुए तथ्यों को आपको जानने चाहिये।
1. अटल जी एक मात्र ऐसे संसद सदस्य हैं, जो चार विभिन्न प्रदेशों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली के 6 अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों से संसद पहुंचे।
2. अपने जीवन काल में आजीवन ब्रह्मचारी रहने का व्रत लेने वाले श्री वाजपेयी जी ने एक ‘बेटी’ को गोद लिया। उनकी बेटी का नाम ‘नमिता’ है। वे नारीहितों के लिए काम करने वाले अग्रणी नेताओं में से एक थे।
3. अटल जी भारतीय राजनीतिक इतिहास के एक मात्र ऐसे राजनेता हैं, जो अपनी पार्टी और विपक्षी दलों में सामान रूप से लोकप्रिय हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने राज्यसभा में अपने एक भाषण के दौरान अटल जी को भारतीय राजनीति का ‘भीष्म पितामह” कहा था।
4. 1957 में पहली बार बलरामपुर संसदीय क्षेत्र से संसद पहुँचने वाले अटल जी 2009 तक 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। महज एक बार 1984 में ग्वालियर से माधव राव सिंधिया के खिलाफ चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
5. 1977 में संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि के रूप में हिंदी में भाषण देकर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को भारत की ‘राष्ट्रभाषा’ की विशिष्टता से परिचित कराया।
6. गजल सम्राट स्वर्गीय जगजीत सिंह जी के साथ अटल जी ने 1999 और 2002 में ‘नयी दिशा’ और ‘संवेदना’ दो एलबम लॉन्च किये। उन्हें प्रकृति के प्रति श्रद्धा रखने वाले ‘छायावादी’ कवियों में शुमार किया जाता है।
7. पॉलिटिकल पंडितों के अनुसार गठबंधन की सरकार सफलतापूर्वक चलाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय राजनीति को एक नए युग में प्रवेशित कराया।
8. पिछले साल मोदी सरकार ने अटल जी के जन्म 25 दिसंबर के जन्मदिन को गुड-गवर्नेन्स
डे के रूप में मनाना शुरू किया है।
9. साल 1939 में महज 15 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने के बाद, उन्होंने 1947 में संघ के ‘पूर्ण कालिक प्रचारक’ के रूप में समाजसेवा प्रारंभ करते हुए आजीवन अविवाहित और अवैतनिक रहने का संकल्प किया।
10. मई 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण से अमेरिका सहित सारी दुनिया को भारत की कूटनीति और सामरिक ताकत से परिचित कराया। यह परीक्षण अटल जी के नेतृत्वकाल को भारत के प्रतिरक्षा (Defence) जगत में माइल स्टोन के रूप में जाना जाता है।
अमेरिका जैसे पश्चिमी राष्ट्रों के तमाम सामरिक प्रतिबंधों के बावजूद किये गए इस न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भारत दुनिया की 6 वीं परमाणु ताकत के रूप में जाना गया ।
11. स्वर्णिम चतुर्भुज, रक्षा क्षेत्र में एफडीआई, आगरा समिट और परमाणु परीक्षण जैसे निर्भीक और कड़े फैसले लेने में अटल जी को महारत हासिल थी। कारगिल युद्ध के समय अटल जी की ‘डिप्लोमेसी’ निर्विवाद रूप से सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
नाभिकीय युद्ध के मुहाने पर खड़े दोनों देशों को अटल जी ने सूझ-बूझ और नेतृत्व कुशलता से बचा लिया।
12. अपने 5 वर्ष के अल्प कार्यकाल में उन्होंने इकॉनोमिक रिफॉर्म के लिए बहुत सारे काम किये। उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को बढ़ावा देने के लिए, निजीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
13. पाकिस्तान से वार्ता करने पर संसद में विरोध होने पर,उनका ये बयान काफी लोकप्रिय रहा “हम इतिहास बदल सकते हैं, भूगोल नहीं! मित्र बदल सकते हैं,पड़ोसी नहीं! इस पड़ोस के साथ रहना ही है तो, क्यों ना इनसे निबटने का तरीका बदल डालें !”
14. श्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके शिक्षक पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी दोनों ने वकालत की पढ़ाई कानपुर के एक ही कॉलेज की एक ही कक्षा और एक ही छात्रावास में रहते हुए की थी ।
15. पंडित नेहरु ने अटल जी की प्रखर और ओजमयी व्याख्यान शैली से प्रभावित होकर उनके बारे में बहुत पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि “वे जरुर एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनेंगे।”
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