डांगियावास । 1958 में एशियन के ओलम्पिक खेलो में भारत के लिए 400 मीटर दोड़ में गोल्ड मेडल जितने वाले मिल्का सिंह शायद ही परिचय के मोहताज हो । उनकी दोड़ने की अद्भुत शक्ति ओर सामर्थ्य से उन्होंने देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया । ओलिंपिक खेल हो या एशियन या कोई और विश्व स्तरीय प्रतियोगिता हर क्षेत्र में उन्होंने खुद का और देश का नाम रोशन किया ।
वर्तमान में भी कई ऐसे शख्स है जो इस प्रकार कि ्प्रतिभा से धनी होते हुए भी आगे नही बढ़ पा रहे है उन्ही में से एक है "संदीप आचार्य "।
जी है । इस अनसुने और अजनबी नाम ने वो कर दिखाया जिसे शायद भारत के श्रेष्ट और पेशेवर धावक ही कर सकते है । संदीप न तो कोई पेशेवर खिलाड़ी है और न ही कोई प्रसिद धावक । पुलिस कांस्टेबल की नौकरी पाने के लिए इस इंसान ने जिन्दगी की पूरी दोड़ मानो एक साथ ही कर दी हो । इन्होने 10 km की रेस मात्र 33 मिनट में पूरी कर भारत के राष्ट्रिय रिकॉर्ड की बराबरी कर दी जिसे पूरी करना हर किसी के बस की बात नही है । जब इन्होने अपनी दोड़ पूरी की तब तक इनके साथी आधे रस्ते ही पहुचे थे । जब अधिकारियो को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने भी इनकी तारीफ़ की । हर समाचार चेनल चाहे वो प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक । सबकी सुर्खियों में रहे । इन्हें राजनेताओ से बड़े बड़े वादे मिले पर आज तक कुछ नही मिला । वर्तमान में किशनगढ़ पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में कांस्टेबल के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है । अगर इन्हें कोई अच्छा कोच मिले और सही प्रशिक्षण मिले तो यह अपने देश का नाम रोशन कर सकते है । पर भारत जेसे देश में इस प्रकार की उम्मीद ही बेई मानी है । इतनी प्रतिभा के धनी होते हुए भी इनको आज तक कोई सही मार्गदर्शक नही मिला और यह आज भी 9000 में नौकरी करने की मजबूर है । अभी भी अगर इन्हें खेल कोटे में चयन करके सही अभ्यास कराया जाए तो यह अपने डिपार्टमेंट और देश का नाम रोशन कर सकते है ऐसी हम उम्मीद करते है
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सौजन्य से :- www.dangiyawasnews.com
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