1. बरसाना की लट्ठमार होली
बरसाने की होली की कमान औरतों के हाथ में रहती है, जो नंदगांव के पुरुषों पर लट्ठ से वार और रंगों की बौछार करती हैं. लट्ठमार होली सप्ताह भर पहले शुरु हो जाती है जिसका जश्न पूरे सप्ताह चलता है. हम ये भी बताते चलें कि बरसाना राधा और नंदगांव कृष्ण का गांव रहा है.
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2. मथुरा और वृन्दावन की पारम्परिक होली
मथुरा वो जगह है जहां कृष्ण का जन्म हुआ था और वृन्दावन में पालन-पोषण, तो होली के दौरान यहां का माहौल देखते ही बनता है. सभी लोग कृष्ण की भक्ति और रंगों में सराबोर रहते हैं, और दोस्तों के संग तो यहां मजा दुगुना हो जाता है. तो निकल पड़िए मथुरा की ओर.
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3. शांति निकेतन की सांस्कृतिक होली
इसे ‘बसंत उत्सव’ के नाम से भी पश्चिम-बंगाल में मनाया जाता है जिसे दुबारा गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने शुरु किया था. यहां होली में युवा पारम्परिक परिधानों में सज-संवर कर वसंत का स्वागत करते हैं, और रंगों के साथ-साथ फूलों से होली खेलते हैं.
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4. पुरुलिया की लोक होली
पुरुलिया भी पश्चिम बंगाल की ही एक खूबसूरत जगह है जहां वसंत उत्सव के तौर पर तीन दिनों तक स्थानीय लोग-बाग लोक संगीत गाते हैं और लोक नृत्य का भी प्रदर्शन करते हैं. तो यहां जाइए और लोक संगीत के साथ रंगों का मजा लीजिए.
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5. आनंदपुर साहिब की योद्धा होली
पंजाब राज्य के स्वर्णिम इतिहास में यहां के रणबांकुरों द्वारा लड़े गए युद्धों की भी अहम भूमिका है, और होली में आनंदपुर साहिब में रंगों के बजाय रण कौशल की प्रदर्शनी होती है जिसमें तलवार भांजना, कुश्ती, हवाई करतब और पगड़ी बांधना भी शामिल है. इसकी शुरुआत सिक्खों के अंतिम धर्म गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने की थी.
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6. उदयपुर की राजसी होली
राजस्थान प्रांत के राजसी ठाठ-बाट से मिलती जुलती ही वहां की होली भी होती है जिसमें होली की पूर्व संध्या पर उदयपुर में राजघराने की ओर से जलसे का आयोजन किया जाता है. उसमें राजमहल से मानेक चौक तक उत्सव-यात्रा का आयोजन किया जाता है, इसकी रौनक तो बस देखते ही बनती है.
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7. मुंबई में झुग्गी के बच्चों संग सामुदायिक होली
धारावी जिसे मुंबई के सबसे बड़े झुग्गी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, बिलकुल भी निराशाजनक जगह नहीं है. और, बात यदि होली की हो रही हो तब तो कतई नहीं. क्योंकि, यहां सामुदायिक स्तर पर होली का आयोजन किया जाता है जिसमें रंगों के साथ गानों की धुनों पर लोग थिरकते हैं और सबसे जबर्दस्त बात ये है कि इस समारोह से कमायी गयी 80% धनराशि धारावी के कल्याण के लिए जाती है.
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8. जयपुर में हाथियों संग होली
राजस्थान के जयपुर में होली के मौके पर हाथियों को न सिर्फ़ सजाया-संवारा जाता है बल्कि उनके द्वारा नृत्य, सुंदरता प्रतियोगिता, रस्साकशी के भी आयोजन कराये जाते हैं, जिसे देखने के लिए न सिर्फ़ देश बल्कि विदेश से भी सैलानी जयपुर चलकर आते हैं. तो आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं जनाब, उठाइए अपना बैग और निकल पड़िए.
9. दिल्ली की आधुनिक होली
जैसी दिल्ली है वैसी ही इसकी होली भी है. यहां होली भी बिलकुल दिल्ली की तरह ही बेबाक और बेलौस अंदाज़ मे मनायी जाती है और यहां न सिर्फ़ जान-पहचान वाले बल्कि अनजान लोग भी आपको रंगों से सराबोर कर सकते हैं. और यदि आप नई दिल्ली स्टेशन के नजदीक पहाड़गंज में हैं तो बस आप वहां के स्थानीय लोगों और दुकानदारों द्वारा रंग के साथ-साथ भंग के लिए भी तैयार रहिए क्योंकि दिल्ली का मतलब पुरानी दिल्ली है, जो कि यहीं से शुरु होता है.
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10. हम्पी में विदेशियों संग होली
कर्नाटक राज्य या कहे कि पूरा दक्षिण भारत अमूमन होली के उत्सव के लिए नहीं जाना जाता, मगर हम्पी की बात ज़रा अलग है जहां पूरा शहर ही होली के दिन उत्सव में शामिल हो जाता है और अपने साथ विदेशी सैलानियों को भी शामिल कर लेता है. ये उत्सव विजयनगर राज्य के पुराने साम्राज्य की भी एक झलक है जिसमें पूरा शहर ढोल-नगाड़ो के साथ जश्न में शरीक होता है.
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11. काशी (वाराणसी) की भांग वाली होली
महादेव की नगरी की हर बात ही निराली होती है. चाहे वो देव दीपावली हो, शिव की बरात हो या फिर हरदिल अज़ीज़ होली. यहां हर कोई सारे त्योहारों को कुछ इस तरह मनाता है जैसे कि वह दिन उनकी ज़िदगी का आख़िरी दिन हो. तो यहां के लोग भांग और ठंडई के साथ ही साथ लोकगीतों का भी मज़ा लेते हैं. तो निकल पड़िए काशी की ओर, कि बाबा ने बुलाया है.
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12. पटना की कपड़ा-फाड़ होली
बिहार राज्य की राजधानी न सिर्फ़ राजनीतिक कारणों से चर्चा में रहती है बल्कि यहां के कपड़ा फाड़ होली की वजह से भी चर्चित रहती है. इसमें ख़ास रूप से यहां की राजनीतिक हस्तियां भी शामिल होती है. और यदि कोई कोर-कसर रह गयी हो तो फिर नल्ली-नाले का कीचड़ तो है ही जो कभी भी आपके शरीर पर कहीं से भी आ सकता है, तो बचके रहना रे बाबा!
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अब जो इतना मेहनत करके लेखक ने ये लेख लिखा है तो लेखक चाहता है कि आप सारी दुनियादारी छोड़कर होली के हुड़दंग में शामिल हो जायें, क्योंकि लेखक तो इन्हीं उपरोक्त जगहों में से किसी एक जगह पर होली के दिन पर होगा. तो आप भी निकल पड़िए होली के जश्ने-हुड़दंग में शामिल होने के लिए, हो सकता है लेखक से मुलाकात हो जाए. जय हिन्द!
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