जय तेजा जी री दोस्तों।।
क्षमा चाहूगां, काफी दिनों बाद आपके सामने हाजिर हो रहा हु। पढाई की व्यस्तता के चलते आप लोगो से थोडे दूर रहा।
आज एक मित्र की फेसबुक प्रोफाइल पर देखा की एक मारवाड़ी फिल्म "राजू राठौड़" प्रदर्शित होने वाली है। तो अपने आप को लिखने से नहीं रोक पाया।
हम लोग आये दिन कोई न कोई बॉलीवुड फिल्म देखते रहते है। चाहे वो अच्छी हो या न हो। चाहे वो मनोरंजक हो या न हो, भले ही वो अश्लीलता से भरी हो । भले ही वो पैसे किसी शांतिप्रिय कौम के जेब में जा रहे हो पर हम देखते जरूर है।
कभी हमने अपनी मारवाड़ी जुबान की फिल्म देखने की जहमत क्यों नहीं उठाई?
इसके बारे में मेरे एक मित्र का कहना है की "मारवाड़ी फिल्मो अच्छी नहीं होती। उसमे गुणवता नहीं होती।"
इसका सीधा सा जवाब ही की जब तक आप लोग मारवाड़ी फिल्मे देखेगे नही , तब तक वो अच्छी बनेगी नहीं। जब आप देखना शुरू करेगे,तब हमारे निर्माता/निर्देशक प्रोत्साहित होगे और कुछ अच्छा बनाना शुरू करेगे।।
और फिर आपको गुणवता फिल्मे मिलेगी,जब अच्छी फिलमे बनेगी तो ज्यादा लोग देखेगे और इस से अपनी मारवाड़ी संस्कृति को लोग और नजदीक से जानेगे। जिससे अपने राजस्थान ,अपने मारवाड़,अपने जोधाणा को एक अलग पहचान मिलेगी।।
आप दक्षिण भारतीय,भोजपुरी,पंजाबी सिनेमा को देख लीजिये वहां बॉलीवुड सिनेमा के समान्तर फिल्मे चलती है।
क्योकि वह के लोग सिर्फ अपनी भाषा की मूवी देखते है।
इसी तरह यदि हम भी अपनी मारवाड़ी फिल्मकारो को प्रोत्साहित करे तो तो आने वाले दिनों में मारवाड़ी सिनेमा को एक नई पहचान मिलेगी।
तो दोस्तों आप लोगो से मेरी यही गुजारिश है अप लोग "राजू राठौड़" फिल्म को जरुर देखे।
आपके 100-150 रूपये खर्च करने से आपको कुछ फर्क नही पड़ेगा।
पर इस से हमारे मारवाड़ी सिनेमा को जरुर फर्क पड़ेगा।
हमारी मारवाड़ी जुबान को पहचान मिलेगी।
राष्ट्रिय पटल पर एक नए सिनेमा क निर्माण होगा,जो सिर्फ मारवाड़ी माटि की जुबान जानेगा।
आप जरुर जाना ।।।।।मेरे विनम्र निवेदन है।।

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