डांगियावास : सरकारी स्कूल में खेलकूद की गतिविधिया नगण्य,गाव का प्रशासन बेखबर

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हर बच्चे के माँ बाप यही सोचते है की उनका बच्चा पढाई के साथ खेलकूद की गतिविधिया मे भी रूचि ले |ताकि वो मानसिक तंदुरस्ती केसाथ साथ शारीरिक रूप से भी तंदरुस्त रहे | यदि बच्चे नियमित रूप से खेलते रहते है तो शारीरिक विकास भी समग्र रूप से होता है तथा उनकी प्रतिभा भी खुल कर बाहर  आती ही है | खेलकूद के महत्व को शास्त्रों में भी दर्शाया गया है | शास्त्रों में भी कहा गया है की स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है है | विद्यालयों में इसके लिए अलग से पीरियड की भी व्यवस्था की जाती है ताकि बच्चो को खेलकूद में भी निपुण बनाया जा सके | पर डांगियावास सरकारी स्कूल में इन सबके उल्ट ही चल रहा है | यहाँ पर बच्चो में स्पोर्ट्स से सम्बंधित कोई रूचि ही नहीं है |जब इनके कारणों को टटोला गया तो एक आश्चर्य जनक सत्य सामने आया | की यहाँ के स्कूल में बच्चो को कोई भी गेम नहीं खिलाया जाता है | स्कूल में जब शारीरिक शिक्षक है तो फिर क्यों नहीं हो रहा ये सब ?

क्यों हो रहा है बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ ?
जब कोई खेल की गतिविधि हि नही तो फिर शारीरिक शिक्षक की स्कूल में क्या जरुरत है ?
गाँव का प्रशासन क्यों मौन है ?
हमारे सरपंच साब की सोच हम युवा से मिलती है फिर क्यों वो मौन है ?

जब से हमने समझना शुरू किया तब से गाँव में एक ही शारीरिक शिक्षक को देख रहा हु वो है महेंद्र जी |
जब से वो इस स्कूल में है तब से कुछ नहीं कर रहा है सिवाय टाइम पास के |
इस शख्श ने एक निति अपना राखी है लोगो केसाथ गुल मिल रहो फिर कुछ भी मत करो , काम बनता रहेगा |


यदि गाँव में कोई दम ख़म वाला आदमी है तो प्लीज कुछ करो |


मनमोहन सिंह मत बन जाना 
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