
जैसा की विदित है की डांगियावास नेशनल हाईवे पर स्थित है तथा जोधपुर शहर से भी ज्यादा दूर नहीं है | डांगियावास का नाम अब किसी भी रूप से अपनी पहचान के लिए मोहताज नही है | वैसे भी अब भौगोलिक समीकरण बदल रहे है, तथा डांगियावास गाँव से कस्बे में परिवर्तित हो रहा है | अब जब डांगियावास की पहचान के बारे में सारी बाते स्पष्ट हो चुकी है | तो हर आदमी यही चाहता है की उसके गाँव में हर बुनियादी सुविधा उपलब्ध हो | ताकि उसका जीवन सुविधा जनक रूप से व्यतीत हो | पर डांगियावास में इन चीजो के उलट ही हो रहा है | अब जब बारिश की सीजन चल रही है है आपको अपने गाँव के मार्किट में जाना पढ़ गया तो समझो आपके लिये मुसीबत आ गयी |अब आप सोच रहे होगे की भाई अपने गाँव के मार्किट में जाने में क्या मुसीबत आ गयी ? तो अब में आपको बताऊंगा की क्या मुसीबत है ? जैसे ही आप अपने घर से बहार निकलेगे, आप बाहर निकल कर सोचेगे की " कही मै सुंदरवन के "दलदल " क्षेत्र में तो नहीं आ गया | अब आप एक बार फिर् सोचेगे की जाऊ या नहीं ? क्युकी पुरे रस्ते में इतना कीचड़ होगा की आप उस कीचड़ से झुझते झुझते हार ही मान जाओगे | पुरे रास्ते में इतना पानी भरा हुआ होगा की आपको लगेगा की कही में तालाब में तो नहीं आ गया | सबसे ज्यादा बुरी हालत तो डांगीयो के बास की है | वहा तो अभी भी जाना नामुमकिन है| क्या आप जानते है ऐसा क्यों हो रहा है ? इसका एक ही कारन है की गाँव में पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था नहीं है | घर की नाली से पानी निकल कर सीधे रास्ते पर आ जाताहै , उसके बाद वो रास्ते पर ही जमा हो जाता है | इसके कारन गाँव में ये कीचड़ का रूप ले लेता है | यही कीचड़ गाँव में विभिन्न रोगों को जन्म देता है | गाँव में पानी के जमा के होने के मूल रूप से दो कारन है
1. निकासी के लिए नाली की व्यवस्था न होना
२. पानी यदि रास्ते के ढलाव के साथ निकल भी जाता है तो भी तालाब तक नहीं पहुच पाता है क्योकि तालाब के किनारे पर लोगो ने अतिक्रमण कर लिया तथा पक्के आवास बना लिए ,इस कारन पानी निकल नहीं पाता है और कीचड़ के रूप में जमा हो जाता है |
डांगियावास एक शिक्षित गाँव है, तथा यहाँ के लोग भी काफी जागरूक है | फिर भी यहाँ के लोग बुनियादी सुविधाओ से महरूम है | यहाँ के स्टेशन पर पर भी विशिष्ट लोगो का आना जाना लगा रहता है | फिर भी ऐसा क्यों ? गाँव में युवाओ का बोल बाला है, हमारा सरपंच भी युवा है ,पढ़ा लिखा है ,फिर भी ऐसे हालत क्यों ?
इसमें शायद हमारा ही दोष है क्योकि हम लोग आंखे मूँद कर बैठे हुए है | गलत चीजो को भी हम लोग हँसते हुए स्वीकार कर लेते है | शायद यही कारन है, अगली बार चुनाव में क्यों न युवा अपनी भागीदारी निभाये और गाँव के विकास हेतु क्यों न हम घोषणा पत्र बनाये और जो उसे स्वीकार करे उसे हम वोट दे |
जय हिन्द
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