नई दिल्ली. सीटीएस का पूरा नाम चेक ट्रंकेशन सिस्टम होता है। इसमें चेक क्लियरिंग के लिए चेक को एक बैंक से दूसरे बैंक तक भेजना नहीं पड़ता है। इसके लिए चेक की एक डिजिटल इमेज स्कैन करके भेज दी जाती है, जिसकी वजह से चेक क्लियरिंग में समय काफी कम लगता है।
इतना ही नहीं, इससे चेक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में लगने वाले समय और पैसे की भी बचत होती है। इस तरह से यह कहा जा सकता है कि अब चेक क्लियर करने में सिर्फ कुछ क्लिक की जरूरत होती है और चेक क्लियर हो जाता है।
क्यों पड़ी सीटीएस की जरूरत
चेक क्लियरिंग में लगने वाले समय को कम करने और इससे होने वाले फ्रॉड को कम करने के लिए सीटीएस को लाया गया। सीटीएस के जरिए वैरिफिकेशन काफी आसान और तेज होता है, जिसकी वजह से फ्रॉड की संभावना काफी कम हो जाती है। सीटीएस से पहले चेक क्लियर होने में भी काफी समय लग जाता था, जिसकी वजह से न केवल ग्राहकों, बल्कि बैंक को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था।
अब क्या होगा नॉन सीटीएस चेक का
फरवरी 2015 के बाद जारी किए गए सभी चेक को अब अनिवार्य तौर पर चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) के अनुरूप होना होगा। इसके लिए धीरे-धीरे नॉन-सीटीएस चेक को व्यवस्था से बाहर किया जा रहा है। इसके तहत एक मई 2014 से नॉन-सीटीएस चेक की क्लियरिंग हफ्ते में केवल दो बार (सोमवार और शुक्रवार को) की जा रही है। यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 2014 तक चलेगी। इसके बाद एक नवंबर 2014 से इनकी क्लियरिंग हफ्ते में केवल एक दिन (सोमवार को) की जाएगी। उसके बाद फरवरी 2015 से नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी।
सीटीएस चेक क्लियरिंग में कैसे होता है काम
सीटीएस चेक क्लियरिंग सिस्टम को समझने के लिए एक उदाहरण का सहारा लिया जा सकता है। मान लेते हैं सुरेश का अकाउंट A बैंक में है और वह रमेश को एक चेक देता है। रमेश का अकाउंट B बैंक में है। रमेश चेक को B बैंक में क्लियरिंग के लिए जमा कर देता है। B बैंक इस चेक को स्कैन करता है और स्कैन इमेज को क्लियरिंग हाउस ग्रिड के माध्यम से A बैंक को भेज देता है। A बैंक चेक में सुरेश के साइन को वैरिफाई करता है और उसके खाते से पैसे काटकर चेक का पेमेंट कर देता है। इस पूरी प्रक्रिया में चेक को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं भेजना पड़ता है, जिसके कारण यह प्रक्रिया 24 घंटे में ही पूरी हो जाती है।
क्या होता था सीटीएस से पहले
सीटीएस सुविधा से पहले किसी भी चेक को एक बैंक से दूसरे बैंक में भेजना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था, जिसके कारण पेमेंट में देरी होती थी। यदि इसे भी पहले वाले उदाहरण से समझें तो रमेश चेक को B बैंक में क्लियरिंग के लिए जमा करता है। वह चेक भुगतान के लिए A बैंक को भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो दिन लग जाते थे। अगर चेक दूसरे शहर का होता था, तो यह समय 4-5 दिन तक भी हो जाता था।
क्या हैं सीटीएस के फायदे-
फ्रॉड होने की कम हो जाती है संभावना
सीटीएस चेक में स्पेशल कैरेक्टर होते हैं। स्कैनिंग मशीन से इन स्पेशल कैरेक्टर का ही वैरिफिकेशन किया जाता है, इसलिए किसी भी फ्रॉड की संभावना काफी कम हो जाती है। चेक देने वाले के सिग्नेचर ऑनलाइन होते हैं, इसलिए उसे तुरंत वैरिफाई करना काफी आसान हो जाता है।
जेबी भोरिया, क्षेत्रीय निदेशक (पश्चिम ग्रिड), आरबीआई
अन्य फायदे-
1- कुछ घंटों में ही आपके खाते में पहुंच जाता है पैसा।
2- जमा करने के समय ही चेक के जाली होने की जांच हो जाती है।
3- काम ऑनलाइन होने की वजह से कम समय में अधिक काम किया जा सकता है, जिसके चलते प्रोडक्टिविटी बढ़ती है।
4- ऑपरेशनल रिस्क कम हो जाता है।
5- पेपर क्लियरिंग को लेकर होने वाले रिस्क से भी छुटकारा मिलता है।
6- बैंकों और ग्राहकों दोनों को सहूलियत रहती है।
चेक लेन-देन में रखें इन बातों का ध्यान-
बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ और पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व मुख्य महा प्रबंधक यू. एस. भार्गव के अनुसार चेक से लेन-देन करने वाले व्यक्ति को कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखनी चाहिए, ताकि चेक का सुरक्षित उपयोग हो सके।
1. पेई (Payee) का नाम सही तरीके से भरा जाए, जो एमाउंट भरा जाए, वह शब्दों और अंकों में एक ही हो और इसमें तारीख भी सही तरीके से भरी जाए।
2. किसी बियरर चेक की राशि किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती है जो इसे पेश करता है। अगर किसी चेक की अदायगी किसी खास व्यक्ति को की जानी है, उस चेक से बियरर शब्द काट देना चाहिए। ऐसी स्थिति में बैंक की ओर से उसे अदायगी होती है, जिस पेई का नाम उस चेक पर लिखा हुआ है।
3. चेक के ऊपरी हिस्से पर बायें कोने में दो पैरेलल लाइन्स बनाना यब बताता है कि काउंटर पर उस चेक का पेमेंट नहीं किया जा सकता, यानि ऐसी स्थिति में किसी बैंक खाते में ही इसका पेमेंट किया जा सकता है।
4. अगर उन पैरेलल लाइन्स के बीच ‘एकाउंट पेई’ लिखा हुआ है, तो इसका मतलब यह है कि उस चेक का पेमेंट केवल उसी व्यक्ति के बैंक खाते में हो सकता है जिसका नाम उस चेक पर लिखा हुआ है।
5. पेई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह चेक पुराना होने से पहले पेमेंट के लिए बैंक में पेश कर दिया जाए। इसका मतलब यह है कि चेक पर डाली गई तारीख के तीन महीने के भीतर उसे पेमेंट के लिए पेश कर देना चाहिए।
6. अगर चेक सही तरीके से नहीं लिखा गया है या जिस खाते से अदायगी की जानी है, उसमें पर्याप्त राशि नहीं है, तो चेक बिना पेमेंट के वापस कर दिए जाते हैं।
7. अगर खाते में अपर्याप्त राशि होने की वजह से चेक वापस लौट जाता है, तो नेगोशिएबल इन्स्ट्रुमेंट्स एक्ट के सेक्शन 138 के तहत यह एक फौजदारी अपराध माना जाता है। ऐसा होने के बाद पेई वह चेक जारी करने वाले को इस आशय का नोटिस भेज सकता है। यह नोटिस जारी करने के 30 दिनों के भीतर यदि चेक जारी करने वाला व्यक्ति कोई जवाब नहीं देता, तो उस एमाउंट की रिकवरी के लिए वह कोर्ट का सहारा ले सकता है।
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