मिग-27 विमान अपग्रेड करने में इतनी देर कि बाहर करने की तारीख करीब आ गई
जोधपुर. एयरफोर्स की चार स्क्वाड्रन में तैनात करीब 60 मिग 27 लड़ाकू विमान वर्ष 2016 में रिटायर कर दिए जाएंगे लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इन्हें अपग्रेड करने के लिए 311 करोड़ रुपए न केवल स्वीकृत किए, बल्कि पिछले साल जनवरी 2013 तक इसमें से करीब 155 करोड़ की राशि खर्च भी हो गई। हाल में कैग की ओर से संसद में पेश रिपोर्ट में इस मामले में आपत्ति जताई गई है। गौरतलब है कि करीब चार दशक पुराने इन लड़ाकू विमानों को ‘बहादुर’ नाम से जाना जाता है। इनमें से आधे जोधपुर और आधे पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा में तैनात है। दोनों जगह इनकी दो-दो स्क्वाड्रन है। एक्सपर्ट व्यू, एके सिंह, एयर मार्शल, (रिटायर)
वारफेयर सिस्टम लगाने में कर दी देरी
एयरफोर्स में चालीस साल से हवाई सीमा की रक्षा करने वाले मिग 27 में बदले समय के साथ मॉर्डन वारफेयर सिस्टम की लंबे समय से जरूरत थीं, लेकिन इसे लगाने में देरी कर दी। जब जरूरत थी तब तो फंड नहीं दिया और अब फेज आउट के समय फंड देना गलत है। वैसे भी एमएमआरसीए व तेजस जैसे विमानों की खरीद में देरी हो रही है। ऐसे में इस विमान का अपग्रेड रहना जरूरी है, लेकिन सिस्टम लगाने में देरी से ऑपरेशनल तैयारियां प्रभावित हो रही है।
3 वर्ष पूर्व पैसा मिला, रिटायरमेंट तक लगेगा सिस्टम
1975 में भारतीय वायुसेना में शािमल किए गए इन विमानों की युद्धक प्रणाली को अपग्रेड करने के लिए इनमें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम ‘तक्षक’ लगाए जा रहे हैं। इस योजना काे रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2009 में मंजूरी दी थी। इसके दो साल बाद वर्ष 2011 में 311 करोड़ रुपए स्वीकृत किए, जबकि एयरफोर्स पहले ही बता चुकी थी कि ये विमान वर्ष 2016 में रिटायर हो रहे हैं। लड़ाकू विमानों में यह प्रणाली लगाने में तीन साल का समय लगेगा, यानी जब तक ये तक्षक से लेस होंगे, तब तक वे बाहर हो जाएंगे। एयरफोर्स ने इनके हटाने की घोषणा काफी पहले कर दी थी, लेकिन तेजस व एमएमआरसीए प्रोजेक्ट में देरी के कारण इन्हें देरी से बाहर किया जा रहा है।
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