ईद मुबारक ! कैसे कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
काटते है गौ माता जीस त्यौहार के लीये,
चुप बैठता है हिंदुस्तान एकात्म भाव के लीये ।
मेरी माँ के हत्या से,
जीसे सैतानी ख़ुशी मिलती है!
उसे ईश्वरीय बढ़ाई कैसे कहूँ ?
ईद मुबारक ! कैसे कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
काटते है गौ माता जीस त्यौहार के लीये,
चुप बैठता है हिंदुस्तान एकात्म भाव के लीये ।
मेरी माँ के हत्या से,
जीसे सैतानी ख़ुशी मिलती है!
उसे ईश्वरीय बढ़ाई कैसे कहूँ ?
ईद मुबारक ! कैसे कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
किसी ने कहा, येसा ना कर !
वो भी तेरा भाई है !!
मैंने कहा, माँ को जो काटे वह भाई नहीं कसाई है,
सदीयो से बढ़ाई इसने ही गहरा खाई है ।
हर साल करता वही-वही हरकत फीर भी मैं चुप चाप कैसे रहुँ ?
ईद मुबारक ! कैसे कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
वो भी तेरा भाई है !!
मैंने कहा, माँ को जो काटे वह भाई नहीं कसाई है,
सदीयो से बढ़ाई इसने ही गहरा खाई है ।
हर साल करता वही-वही हरकत फीर भी मैं चुप चाप कैसे रहुँ ?
ईद मुबारक ! कैसे कहु?
कीसे कहु?
क्यों कहु?
अगनीत सालों से,
अगनीत अत्याचार सहे ।
फीर भी सर्व धर्म समभाव पर हम सब चुप रहे ।
करोड़ों खुन, लुट, बलात्कार की चीख़ पुकार कब तक सहु ? कैसे कहु? क्यों सहु?
ईद मुबारक कैसे कहु, कीसे कहु? क्यों कहु?
अगनीत अत्याचार सहे ।
फीर भी सर्व धर्म समभाव पर हम सब चुप रहे ।
करोड़ों खुन, लुट, बलात्कार की चीख़ पुकार कब तक सहु ? कैसे कहु? क्यों सहु?
ईद मुबारक कैसे कहु, कीसे कहु? क्यों कहु?
तेरे साथ रहने के लीये,
बल्की तुझे साथ रखने के लीये त्याग को मैं तैयार हु ।
तेरे मज़हब के लीये गर्दन भी देने को संस्कार कहते है मेरे।
लेकिन उसके बाद भी, फीर भी तेरे लिये मैं काफीर ही रहु ?
तो बता !
ईद मुबारक कैसे कहु?,
कीसे कहु?
क्यों कहु?
सुरेश चव्हाणके - सुदर्शन न्युज ।
(आज मेरे एक हिंदु भाई ने मुझे ईद मुबारक का मेसेज किया । मैंने १ नई और पुरी कवीता लिख के भेज दी । वैसे कई सालों से कवीता लिख नही पा रहा था । दोबारा लिखने के लीये ९ अगस्त (क्रांती दिवस) का महुर्थ भी मैंने तय किया था । लेकीन भगवान को आज ही स्विकार था । गाड़ी मे बैठै बैठै मोबाईल पर ही लिख दी । ईद के मौक़े पर हिंदुस्तान को समर्पित ! व्याकरण ग़लत हो तो क्षमस्व! (क्षमस्व केवल व्याकरण के लिये । शब्दों या हमले के लिये नही)
बल्की तुझे साथ रखने के लीये त्याग को मैं तैयार हु ।
तेरे मज़हब के लीये गर्दन भी देने को संस्कार कहते है मेरे।
लेकिन उसके बाद भी, फीर भी तेरे लिये मैं काफीर ही रहु ?
तो बता !
ईद मुबारक कैसे कहु?,
कीसे कहु?
क्यों कहु?
सुरेश चव्हाणके - सुदर्शन न्युज ।
(आज मेरे एक हिंदु भाई ने मुझे ईद मुबारक का मेसेज किया । मैंने १ नई और पुरी कवीता लिख के भेज दी । वैसे कई सालों से कवीता लिख नही पा रहा था । दोबारा लिखने के लीये ९ अगस्त (क्रांती दिवस) का महुर्थ भी मैंने तय किया था । लेकीन भगवान को आज ही स्विकार था । गाड़ी मे बैठै बैठै मोबाईल पर ही लिख दी । ईद के मौक़े पर हिंदुस्तान को समर्पित ! व्याकरण ग़लत हो तो क्षमस्व! (क्षमस्व केवल व्याकरण के लिये । शब्दों या हमले के लिये नही)
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