रोडवेज की हड़ताल से 20 हजार यात्री हुए परेशान, हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा प्रशासन

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

रोडवेज की हड़ताल से 20 हजार यात्री हुए परेशान, हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा प्रशासन


रोडवेज की हड़ताल से 20 हजार यात्री हुए परेशान, हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा प्रशासन
जोधपुर. रोडवेज के निजीकरण एवं बस अड्डा प्राधिकरण बनाने के खिलाफ बुधवार को जोधपुर जोन के सभी 9 डिपो में चक्का जाम रहा। इस दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन जोधपुर जोन  के सभी 1894 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। केवल 159 अधिकारी ही दफ्तरों में मौजूद रहे। रार्इ का बाग बस स्टैंड सहित रोडवेज के तकरीबन सभी बस स्टैंड से रोजाना अप-डाउन करने वाली अध्यापिकाएं, नर्स, कर्मचारी, श्रमिक, व्यापारी व आम यात्री बस स्टैंड पर रोजाना की तरह आए, लेकिन संचालन ठप होने से  उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। इससे निजी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ गई। पावटा पुलिया, दल्ले खां की चक्की व कालवी प्याऊ बस स्टैंड से छोटे रूट पर जाने वाली स्टेज केरेज बसों में यात्रियों का ठूंस-ठूंस कर भरा गया। जानकारों के अनुसार प्रतिदिन 20 हजार यात्री अप-डाउन करते है। लेकिन इनके लिए प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी। 

दो बसें बीच में रोकी: जोधपुर जोन कंट्रोल रूम के अनुसार बुधवार को तड़के जयपुर से माऊंट आबू वोल्वो बस व जयपुर से अंबाजी-अहमदाबाद एक्सप्रेस बस को हड़ताली कर्मचारियों ने आबू रोड से आगे नहीं जाने दिया। इनके यात्रियों को निजी बसों में रवाना किया गया। परिवहन विभाग ने रोडवेज की चक्का जाम हड़ताल को देखते हुए 25 स्टेट केरेज बसों को अस्थाई परमिट दिए। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर 30 आॅल इंडिया बसों की व्यवस्था भी यात्रियों को पैकेज टूर के तहत भेजने की व्यवस्था की गई है।
 
प्रशासन ने नहीं की वैकल्पिक व्यवस्था, शहर के हजारों यात्रियों को अपने हाल पर छोड़ दिया
रोडवेज की हड़ताल पूर्व घोषित थी। इसके बावजूद  सरकार और जिला प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। जोधपुर के करीब 20 हजार यात्रियों को परेशान होने के लिए छोड़ दिया। भास्कर ने इस संबंध में सेवानिवृत्त आईएएस व रोडवेज से जुड़े अधिकारियों से बात की। उन्होंने बताया कि हड़ताल में ये वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं।
 
 
क्या वैकल्पिक व्यवस्था करनी थी
सरकार को रोडवेज की हड़ताल से पहले इसे आवश्यक सेवा घोषित करनी चाहिए। कंटिजेंसी प्लान या इमरजेंसी प्लान बनाना था।
राज्य स्तर पर गृह सचिव सभी कलेक्टरों को रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा के साथ ही आम लोगों की सुविधा के लिए अपने स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने के निर्देश देते।
प्रशासन रेलवे अधिकारियों से बातचीत कर लोकल रूट की  ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगवा कर अप-डाउन करने वालों के लिए व्यवस्था की जा सकती थी।
प्रशासन प्राइवेट बस ऑपरेटर्स, आरटीओ व रोडवेज अधिकारियों से बात कर राई का बाग बस स्टैंड या आसपास से कॉन्ट्रैक्ट कैरेज की लंबी दूरी व स्टेज केरेज में छोटे-छोटे रूट की बसें चला सकता था।
 
 
प्रशासन का दावा
विशेष इंतजाम किए: कलेक्टर
कलेक्टर डॉ. प्रीतम बी यशवंत का कहना है कि रोडवेज की हड़ताल से यात्रियों को परेशानी न हो तथा उन्हें सुविधा के इंतजाम के लिए एडीएम द्वितीय मानाराम पटेल को लगाया गया। यात्रियों को गंतव्य स्थान पर पहुंचाने के लिए पुख्ता बंदोबस्त कर राहत पहुंचाई गई।
 
 
ऑल इंडिया परमिट की
30 बसों को लगाया 

एडीएम द्वितीय मानाराम पटेल ने बताया कि ऑल इंडिया परमिट की 30 बसों को दिन में लगाया गया, जिससे यात्री जयपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर सहित अन्य शहरों में आसानी से गए। इसके अलावा स्टेट केरेज की 25 बसों को अस्थाई परमिट देकर यात्रियों को राहत पहुंचाई गई। 
 
कर्मचारियों का तर्क 
 
बस स्टैंड छोटे, कैसे लागू होगा 
सरकार को रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए दिल्ली-पंजाब की तर्ज पर पैसेंजर फाल्ट एक्ट लागू करना चाहिए। राज्य के बस स्टैंड भी छोटे हैं, जहां रोडवेज बसें खड़ी करने में परेशानी आती है। ऐसे में दिल्ली और चंडीगढ़ का कॉन्सेप्ट पर काम करना चाहिए। 
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment